टीकों की खुलेगी पोल, होसकते है एक्सपोज

टीकों की खुलेगी पोल, होसकते है एक्सपोज

टीके का हो सकता है एक्सपोज़

“ना समझ थे, तो गवा दिया अपनो को, अब चोटों से सीख लिया कि कहां कदम रखना है ।“

अब WHO सॉलिडेरिटी ट्रायल कराने जारहा है दुनिया की सभी वैक्सीन का जिसके लिए WHO सभी कम्पनीयो से लगभग एक करोड़ वैक्सीन को WHO को डोनेट करने के लिए कहा है जिससे इनका सॉलिडेरिटी ट्रायल  हो सके, इस सॉलिडेरिटी ट्रायल को WHO को करने में लगभग 2-4 महीने लगजाते है

सॉलिडेरिटी ट्रायल  है क्या

सॉलिडेरिटी ट्रायल एक ऐसी  प्रक्रिया है जिसके तहत एक कॉर्डिनेटिवे फोर्स  से उस दवा की या उस वैक्सीन की जांच कराइ जाती है जिस पर यह ट्रायल होना है और ऐसा कराता है  विश्व स्वास्थ संघटन (WHO)

कोरोना काल में रेमडीशिवर दवा पर है यह सॉलिडेरिटी ट्रायल हुआ जिसमे इसे फेल पाया गया, जिसके बाद इसे कोरोना के इलाज से अलग कर दिया गया, रेमडीशिवर दवा की वजह से दुनिया में कितनी परेशानी हुई कितना पैसा बर्बाद हुआ, कितनी जाने गई और इस कंपनी ने कितना मुनाफा कमाया कौन जिम्मेबार है ? पता नहीं

और अब  WHO सॉलिडेरिटी ट्रायल करने जारहा है वैक्सीन पर, अब पता लग जाएगा कौन सी वैक्सीन कितने पानी में है, अर्थात यह आपके लिए फायदे मंद है नुकसान दायक है या ऐसे सिर्फ ऐसे ही लगवा ली,

सॉलिडेरिटी ट्रायल के बाद आपको इन सवालो के जबाब मिलजायगे

1-कितनी कामगार है
2-लगनी चाहिए या नहीं
3-लगाने से शरीर में क्या असर हुआ है
4-सच में कोरोना सा बचाती है

लेकिन बात सिर्फ इतनी है की यदि वैक्सीन कामगार नहीं निकली तो-

इस सब का जिम्मेबार कौन होगा वैक्सीन कंपनी या WHO या सरक़ार ?

खबरे भी आरही है की वैक्सीन लगवाने की वजह से कई जाने जाचुकी है

WHO सॉलिडेरिटी ट्रायल कर तो रहा है लेकिन, क्या इसमें देर नहीं हो चुकी है ? क्युकि देश की लगभग 60% लोग वैक्सीन लगवा चुके है और WHO अभी इस  ट्रायल को कराने में लगभग 2- 4 महीने लगजाएगे.

यदि who को वैक्सीन पर पूरी तरह से  विश्वाश नहीं है तो सरकार अनेको प्रकार के अभियान चलाकर कर लोगो को क्यों लगा रहे है ?

या तो सरकारों को WHO के इस सॉलिडेरिटी ट्रायल के रिजल्ट का इन्तजार करना चाहिए था या फिर WHO को या सॉलिडेरिटी ट्रायल जल्दी करना चाहिए ,

मानो लो वैक्सीन ट्रायल में  रेमडीशिवर दवा की तरह फेल हो जाती है तो इसका जिम्मेवारी कौन लेगा, वैक्सीन लगाने खरीदने में सरकारों ने अरबों रूपया खर्च करदिया, वैक्सीन कम्पनिया इस का सीधा सीधा लाभ उठा रही है ,ये कम्पनिया वैक्सीन के कारगर होने का दावा भी कर रही है, यदि इनका दवा फेल होता है तो क्या ये कम्पनिया जिम्मेवारी लेगी, ये तो समय ही बतायेगा

 

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